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गोंडवाना बहुत शक्तिशाली है यह सभी को भलीभांति पता है - धन सिंह मरकाम

धन सिंह मरकाम: इसलिए गोंडवाना राजनीतिक इकाई को निपटाने हेतु सब मिलकर काम करते हैं। उन्हे पता है-  जिस दिन गोंडवाना का तूफान आया, अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए, जानबूझकर ट्रायबल का शोषण अत्याचार बलात्कार हत्याकांड प्रताड़ना , अवैध जमीन कब्जा करने वाले और कोयापुनेम व गोंडी भाषा को जानबूझकर वैधानिक मान्यता न दिलाने जैसे जघन्य अपराधों , शोषणों व घटनाओं को अंजाम देने वालों की खैर नही रहेगी। 

गोंडवाना बहुत शक्तिशाली है यह सभी को भलीभांति पता है - धन सिंह मरकाम


क्योंकि ट्रायबल ही एक ऐसा समुदाय है जिस पर कोई भी "ऐरा- गैरा, नत्थू- खैरा " अपना प्रैक्टिकल आसानी से कर सकता है - जिसको बाहुबली दिखनी हो - ट्रायबल को मार सकता है, दबंगई दिखानी है-  ट्रायबल पर गोली चला सकता है। जिसे अपने को श्रेष्ठ और बाकी को तुच्छ दिखाना हो- ट्रायबल पर टट्टी- पेशाब कर सकता है, अपने सांगठनिक श्रेष्ठता के लिए ट्रायबल की हत्याएं कर सकते है। बलात्कार करना हो- ट्रायबल बहन- बेटियां निशाने पर हैं। खरीद फरोख्त करना है- ट्रायबल बहन बेटियाँ  है न।, मजदूरी करवाना है- ट्रायबल है न । किनके बच्चों का भविष्य निपटाना है- ट्रायबल है न । किनके जमीन छीनना है और अवैध कब्जा करना है- ट्रायबल की जमीन है न । शोषक वर्ग का सबसे आसान शिकार -  ट्रायबल है न ।  

             क्या ये सभी कृत्य ट्रायबल के अलावा अन्य समुदाय पर कर सकते हैं ? कभी नही । हिम्मत भी नही होगी । क्योकि अन्य समुदाय पढ लिखकर समझदार व शिक्षित हो चुके हैं, अपने हकाधिकार समझने लगे हैं, अपने धर्म भाषा संस्कृति व साहित्य को समझने व संरक्षित कर लिए हैं। अपने आर्थिक स्रोत को मजबूत कर लिए हैं, रोजगार व्यवसाय सब जमा चुके हैं। क्या सही है ? क्या गलत है ? समझने लगे हैं । बाकी अन्य जो भी है उनके समुदाय के नेतृत्व उनकी रक्षा व सुरक्षा करने तत्पर है। 

      ट्रायबल का क्या ?  कुछ नही ? और कोई नही ? पर्याप्त नेतृत्व होकर भी यह दयनीय हालत है । जिम्मेदार कौन  ? (हम खुद)


अब आप सभी सोच सकते हैं-- 

भला इतनी भोली कोम को कौन सिंहासन पर बैठने देगा ? और क्यों बैठने देगा ? ----  शायद कभी नही । 

      बल्कि आपकी विशेषता बतायी जायेगी कि-  ट्रायबल समुदाय की विशेषता और प्राकृतिक गुण है कि वह भोली-भाली और बहुत सीधी है, और हमे इनके इस विशेषता पर गर्व है। और आप (ट्रायबल समुदाय) फूलकर कुप्पा हो जाते हैं और हम ऐसे ही बने रहना चाहते हैं। (और लोग यही चाहते भी हैं।)

       कहीं न कहीं, कोई माने या न माने--  हम इसी बात/सादगी का खामियाजा आज भुगतने को तैयार हैं कि ट्रायबल पर जैसा चाहे, जो चाहे किया जा सकता है।       

       हम क्या सभी विद्वान/विचारक यह सोचने के लिए बाध्य/मजबूर और चिंतित हैं कि 1700 सौ सालों तक एक तरफा शासन चलाने वाली (जिसके शासनकाल मे हर समुदाय खुश स्वतंत्र और सुरक्षित थे। सोने के सिक्के चलाये गये थे।) इस गोंडवाना समुदाय की यह दीनहीन हालत कैसे हो गयी ?  समझ से परे है ?  जमीर कब जागेगा ? 

           - जब सब कुछ लुट जायेगा ।  

खैर जो है (दारू- दलाली- गुलामी ) वह स्वीकार करें, और सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढें ।

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